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यातायात प्रतिबंध से उद्योग एवं ट्रांसपोर्ट को हो रहा नुकसान सुरेश कुमार शर्माहरिद्वार 

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो

यातायात प्रतिबंध से उद्योग एवं ट्रांसपोर्ट को हो रहा नुकसान सुरेश कुमार शर्माहरिद्वार

हरिद्वार ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन सिडकुल के पूर्व अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार शर्मा ने बतायासिडकुल हरिद्वार में बार-बार लगने वाले यातायात प्रतिबंध से उद्योग एवं ट्रांसपोर्ट को हो रहे नुकसान के संबंध में

आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से प्रशासन का ध्यान सिडकुल हरिद्वार की गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ।

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा, आए दिन लगने वाले लखी मेले, कुम्भ, यात्रा सीजन तथा प्रत्येक शनिवार-रविवार पर्यटकों के भारी आगमन के कारण सिडकुल क्षेत्र में वाहनों के आवागमन पर बार-बार प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

इसका दुष्परिणाम:

आर्थिक नुकसान – नो एंट्री व डायवर्जन के कारण ट्रांसपोर्टरों को प्रतिदिन लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। दो-तीन दिन से पूरी जाम की स्थिति बनी हुई है डीजल, ड्राइवर का समय और गाड़ी का किराया अधिक देना पड़ता है, जिस कारण माल परिवहन की लागत भी बढ़ रही है।

डिलीवरी में देरी – कच्चा माल फैक्ट्री तक समय पर नहीं पहुंच पाता और तैयार माल मार्केट में नहीं जा पाता। कई बार पार्टियों के ऑर्डर भी कैंसिल हो जाते हैं।

राष्ट्रीय महत्व के उत्पाद प्रभावित – सिडकुल से रक्षा उपकरण, दवाइयां, खाद्य सामग्री एवं कृषि उपकरणों का निर्माण होकर पूरे भारत व विदेशों में निर्यात होता है। ये सभी अनुबंध के तहत समयबद्ध डिलीवरी के लिए बाध्य हैं।

साख पर असर – समय पर डिलीवरी न होने पर भारी पेनल्टी लगती है। ऑर्डर कैंसिल होने से उत्पादन कंपनियों व ट्रांसपोर्ट कंपनियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। विदेशों में देश की साख खराब होती है।

कुम्भ 2027 की चिंता:

वर्ष 2027 में महाकुम्भ प्रस्तावित है। उस दौरान महीनों तक यातायात प्रतिबंध रहेगा। यदि अभी से सिडकुल के लिए वैकल्पिक “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” की व्यवस्था नहीं की गई तो उत्तराखंड का औद्योगिक उत्पादन ठप हो जाएगा।

प्रशासन से मांग:

सिडकुल के लिए 24×7 खुला रहने वाला वैकल्पिक मार्ग/बाईपास चिन्हित किया जाए।

आवश्यक वस्तुओं, दवाइयों व निर्यात माल के लिए “ग्रीन कॉरिडोर” पास जारी हों।

कुम्भ 2027 की योजना में सिडकुल से माल निकासी को प्राथमिकता दी जाए।

ट्रैफिक पुलिस, सिडकुल प्रशासन व ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की संयुक्त समिति बनाकर स्थायी नीति बनाई जाए। श्री विपिन चौधरी ने कहा

हरिद्वार धार्मिक नगरी के साथ औद्योगिक नगरी भी है। आस्था और आजीविका दोनों का संतुलन जरूरी है।

 

अतः आपके माध्यम से प्रशासन से अनुरोध है कि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि उद्योग, ट्रांसपोर्ट और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान न हो।

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